Jumma Ki Namaz kaise padhe | जुमा के नमाज पढ़ने का सही तरीका – 2023

Jumma Ki Namaz kaise padhe | जुमा के नमाज पढ़ने का सही तरीका – 2023

अस्सलामु अलैकुम , मैं हूं मोहम्मद आसिक और आज के इस पोस्ट में आपको हम बताने जा रहे हैं Jumma Ki Namaz kaise padhe { जुमा के नमाज पढ़ने का सही तरीका – 2023 }”” और इसके साथ ही साथ जुम्मा का मुकम्मल सही तरीका जानेंगे जुम्मा के लिए क्या-क्या जरूरी है क्या-क्या जरूरी नहीं है यह सारी बातें आज के इस पोस्ट में आपको मिलने वाली हैं,

 

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Jumma Ki Namaz kaise padhe – इसका समय क्या है – jumma Namaz Time क्या है

जुम्मा की अजान आमतौर पर दिन के 12:30 बजे होती है, और हर मस्जिद मे जुम्मा कि नमाज का वक्त अलग अलग होता है, किसी मस्जिद मे 1 बजे से नमाज होती है तो किसी मे 1:30 बजे से और किसी मे 1:45 पे, इस तरह जुम्मा कि नमाज़ का वक्त होता है और अजान 12:30 बजे से हि शुरू हो जाती है।

जुमा की अजान प्रत्येक मस्जिद में 12:30 मैं शुरू होती है हर मस्जिद में जुमा का टाइम थोड़ा अलग अलग होता है लेकिन यह बात माननी होगी जुमा का नमाज जमात में ही अदा की जाती है जुम्मा की नमाज पढ़ने से हमारी हफ्तों का गुनाह माफ कर दी जाती है

 

जुम्मे की नमाज की रकात कितनी होती है? ( Jumma Ki Namaz Ka Tarika ) क्या है
jumma कि namaz में कुल 14 रकाते होती है जुमे की नमाज सेम नमाज की तरह होती है लेकिन जुमे की नमाज में 2 रकअत फ़र्ज़ नमाज पढ़ना जरूरी है

जुमा की नमाज़ कितनी रकत है : जुमा की नमाज़ (jumma namaz) में टोटल 14 रकत है बिलकुल उसी तरह जैसे जुहर की नमाज़ है बस जुमे की नमाज़ में 2 रकअत फ़र्ज़ है |

अब चलिए आपको हम बताते हैं की jumma की Namaz पढ़ने का सही तरीका क्या है सबसे पहले मैं आपको जुमे की नमाज का नियत करना सिखाता हूं जुमे की नमाज अदा करते वक्त एक बात को काफी ध्यान में रखनी है जुमे की नमाज अकेला में नहीं अदा किया जा सकता है जुमे की नमाज हमेशा जमा तो में पढ़ी जाती है और इमाम के पीछे पढ़ते हैं

 

इसीलिए अगर आप अपने घरों के अंदर जुम्मे की नमाज अदा कर रहे हैं तो जुमा के दिन जुम्मा का नियत नहीं करना है बल्कि जोहर नमाज़ की नियत करना है अगर आप जो जुमे की नमाज को मस्जिद के अंदर जाकर पढ़ते हैं तो आपको जुम्मे का नियत करना पड़ेगा

तो आपको कुछ इस तरह से नियत करना है

नियत की मैंने 4 रकअत सुन्नत नमाज़ ए जुमा की वास्ते अल्लाह तआला के मुंह मेरा काबा शरीफ के तरफ अल्लाह हुअक्बर

Note : आप कौन सि रकाते पढ़ रहे हैं और कितने रकाते पर रहे हैं हर नमाज में नियत करते वक्त आपको बोलना पड़ेगा यह नियत करना पड़ेगा

Jumma namaz ki tarika

सबसे पहले 4 रकत सुन्नत इ मुवाकदा पढ़े
अब इमाम शाहब के साथ 2 रकत फ़र्ज़ पढ़ें
फिर से 4 रकअत सुन्नत इ गैर मुवाकदा पढ़े
फिर 2 रकअत सुन्नत इ गैर मुवाकदा पढ़े
उसके बाद 2 रकअत नफल पढ़
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ये 14 रकाते अगर आप पढ़ लेते हैं तो आपका जुमे की नमाज पूरी तरह से मुकम्मल हो जाता है

नियत करने के बाद अपने हाथों को कानों से मिलाकर अल्लाह हू अकबर पढ़ते हुए अपनी दोनों हाथों को बांध लेना। पहले आपको सना पढ़नी है जैसे कि साना कुछ इस प्रकार है। -सुब हान कल-लाहुम्मा व बिहमदिका व-त बारकस्मुका व-त आला जददुका वला इलाहा गेंरुक”। , सना को पढ़ने के बाद।–।आप अऊज़ुबिल्लाही मिनाश सैतानिर्रजिम बिस्मिल्लाह हिर्रहमा निर्रहीम पढ़ेंगे।– फिर सूरह फातिहा पढ़ना है जैसे कि कुछ इस प्रकार है — आल्हामदुलीलही रब्बिल आलमीन
अर रहमा निर रहीम
मलिकि यौमिद्दीन
इययाक न अबुदु व इय्याका नस्तईन
इहदिनस सिरआतल मुस्तकीम
सिरताल लजीना अन अमता अलय हिम
गैरिल मॅगडूबी अलय हिम व लद दालीन। (आमीन) जब आप सूरह फातिहा पढ़ लेंगे तो आपको अमीन कहना है,

उसके बाद कुरान की कोई सूरह पढ़ें या आयत पढ़े जो आपको याद हो लेकिन ध्यान रखनी है कुल हू अल्लाहू। दूसरी रकात में पढ़नी है जैसे हम खारा होते हैं और सजदा करते हैं तो हमारी 1 रकात कंप्लीट हो जाती है और फिर हम खरा‌ होते हैं और फिर हम सजदा करते हैं तो हमारी दूसरी रकात कंप्लीट होती है तो आपको कुरान की छोटी सुरह। (यानी कुल वल्लाहू )दूसरी रकात में पढ़ने होती है पहले रकात में कोई दूसरा सुरा पढ़ सकते हैं। जैसे कि –

कुल आ ऊजू बि रब्बिल फलक मिन शर्री मा खलक़ वमिन शर्री गासिकिन इजा वकब वमिन शर्रीन नाफ्फासाती फिल उकद वमिन शर्री हसिदिन इज़ा हसद

इसके बाद अल्लाह हू अकबर बोलते हुए आपको रुकूं में जाना है सुबहाना रब्बिल रब्बीयल अज़ीम” आपको इसको 3 बार या फिर 5 बार पढ़ना है फिर  समी अल्लाहु लिमन हमीदह कहते हुए रुकु से खड़े होना है और आपको “रब्बाना वा लकल-हम्द” कहना है खड़े होना है, और अल्लाह हू अकबर कहते हुए आपको सजदे में चला जाना है फिर आपको सजदे में “सुबहाना रब्बिल अला” 3 बार या 5 बार पढ़ना है फिर अल्लाह हू अकबर बोलकर आज सजदे सिर उठाना है और फिर अल्लाह हू अकबर बोलते हुए सजदे में चले जाना है 1 रकात आपका नमाज हो गया फिर से आपको खड़ा होना है दूसरी रकात के लिए क्योंकि आप तो 2 रकात का नियत की है फिर आपको

अल्लाह पर बोलते हुए आपको सीधा खड़ा होना है अब आपको (अल्हम्दु पढ़ना) है उसके बाद कुरान की छोटी सुरह (कुल वल्लाहू) का इस्तेमाल करना है
इसके बाद अल्लाह हू अकबर बोलते हुए आपको रुकूं में जाना है सुबहाना रब्बिल रब्बीयल अज़ीम” आपको इसको 3 बार या फिर 5 बार पढ़ना है फिर  समी अल्लाहु लिमन हमीदह कहते हुए रुकु से खड़े होना है और आपको “रब्बाना वा लकल-हम्द” कहना है खड़े होना है, और अल्लाह हू अकबर कहते हुए आपको सजदे में चला जाना है फिर आपको सजदे में “सुबहाना रब्बिल अला” 3 बार या 5 बार पढ़ना है फिर अल्लाह हू अकबर बोलकर आज सजदे सिर उठाना है और फिर अल्लाह हू अकबर बोलते हुए सजदे में चले जाना है जब आपका सजदा पूरा हो जाएगा तो आपको बैठकर यह पढ़ना है

अत् तहिय्यातू लिल्लाही वस्सल वातू वत्तह्यीबातु

अस्सलामु अलैका या अय्यूहनबी वरहेमतुल्लाही वबरकातूहू

अस्सलामू अलैना वला इबादीस्साॅलेहीन

अशहदु अल्लाह इलाहा इल्लल्लाहु व अश्हदु अन्न मुहम्मदून अब्दुहू व रसूलूहू

अत्तहियात में जब ‘अशहदु अल्लाह इलाहा’ आयेगा तब आप अपनी शहादत की उंगली को उठा कर के छोड़ दें।

अत्तहियात के बाद आप दरूद शरीफ पढ़े, दरूद शरीफ पढ़ना जरूरी है। दरूद शरीफ जैसे –
अल्लाहुम्मा सल्ले अला
मुहम्मदिव व अला आलि मुहम्मदिन
कमा सललेँता अला इब्राहिम व अला आलि इब्राहिम इन्नक हमीदुम मजीद।
अल्लाहुम्मा बारिक अला मुहम्मदिव व अला आलि मुहम्मदिन
कमा बारकता अला इब्राहिम व अला आलि इब्राहिम इन्नक हमीदुम मजीद।

इसके बाद आप कोई  दुआ पड़ेंगे जो आपको याद हो
जैसे कि -।अल्लाहुम्मा इन्नी ज़लमतू नफ़्सी ज़ुलमन कसीरा,
वला यग़फिरुज़-ज़ुनूबा इल्ला अनता,
फग़फिरली मग़ फि-र-तम मिन इनदिका, वर हमनी इन्नका अनतल गफूरूर्र रहीम।

Note.- दोस्त को हमें आशा है कि जुमे की नमाज से रिलेटेड जानकारी मिल गई होगी की नमाज कैसे पढ़ना है सारा मैंने स्टेट बाय स्टेट बता दीई है

नमाज का नियम।:

सभी नमाज एक जैसा ही होता है लेकिन ईद बकरीद शुभ रात इसका नमाजे थोड़ा अलग होती है लेकिन पांच वक्त की नमाज में नियत करने का तरीका अलग होता है नहीं तो सारा चीज एक जैसा ही होता है

 

 

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