इस्लाम धर्म की सचाई | islam quotes…?

इस्लाम धर्म की सचाई | islam quotes…?

 

क्या आप जानते हैं मजहब ए इस्लाम कब से है? इस दुनिया में? क्या इस्लाम की शुरुआत हजरत मोहम्मद सल्ल वाली व सल्लम से हुई या हजरत आदम अली सलाम से हुई? आपको सच्चाई जाननी हैं| तो आप इस पोस्ट को पूरा पढ़िए और मालुम कीजिए की सच्चाई क्या हैं|

 

इस्लाम की तालीम जानें

इस्लाम की बुनियादी तालीम ये है कि अल्लाह एक है उसका कोई शरीक नहीं सिर्फ वही इबादत के लायक है। दूसरा किसी की भी इबादत नहीं की जा सकती। मूर्ति पूजा को इस्लाम में साफ – साफ माना किया हैं| और इसे हराम माना गया हैं

 

दुनिया को किसने बनाया

क़ुरान के मुताबिक अल्लाह नें इंसानों सें लेकर चनिंदा परिंदों दरिया समुंदर ज़मीनों आसमान पैर पौधों पहाड़ और कुरान के मुताबिक सातों आसमान को भी बनाई क़ुरान को हिंदी में पढ़िए गा तो आपको विश्वास होजाएगा

इस्लाम धर्म की सचाई

इस्लाम की रहस्य की सच्चाई यही हैं| की हजरत मोहम्मद सल्ल सें इस्लाम धर्म की सुरू आती नहीं हूई बल्कि दुनिया के सबसे पहले इंसान हजरत आदम अली सलाम जब पैदा हुए तो अल्लाह नें उसे भी एक धर्म दी जिसका नाम दीने ए आदम था

 

लेकिन यह धर्म सिर्फ उसी उक्त के लिए सिमित था इसका यही कारण हैं! की उस समय दीने ए आदम तो था ही लेकिन दीने ए आदम पर लोग भरोसा नहीं करते लेकिन यह धर्म अल्लाह के दिया हुआ धर्म था और लोग अपने अनुसार भूतों की पूजा किया करते थे जैसे की अभी युग में हिन्दू लोग करते हैं|

इसी परेशान को खत्म करने के लिए अल्लाह नें अभी तक क़ुरान के अनुसार 1, 24,000 पैगंबर उतारे जिसमे सें हजरत मोहम्मद सल्ल सबसे आख़री और अंतिम पैगंबर और रसूल हैं|

जो लोगों को सही और सच्चा राह दिखाते हैं| बस यही वजह हैं| की अल्लाह के द्वारा उतरी सबसे आख़री किताब क़ुराने पाक में यह बताया हैं| कि 1, 24,000 पैगंबरो नें जितने भी किताबें लाए उन सभी के किताबों को सिर्फ आख़री किताब यानी( कुराने पाक ) में ईमान लानी होंगी आप यह बाते क़ुरान में लिखी हूई हैं आप क़ुरान को हिन्दी ट्रांसलेट में पढ़ सकते हैं| इंटरनेट या किसी जानकर इमाम सें पूछ सकते हैं|

 

भूतों की पूजा 1400 साल पहले

ज़ब आदम अली सलाम को अल्लाह नें मट्टी सें पैदा किया यानी बनाया उस समय वह दुनिया के पहले इंसान थे जब वो दुनिया में आए तो भीर धीरे – धीरे दुनिया की आवादी बढ़ने लगी फिर आदम अली सलाम को अल्लाह की ओर सें एक मजहब [ धर्म ] मिली जिसका नाम दिने आदम था उस समय लोग अपने ईश्वर [ अल्लाह ] को छोड़ कर और अपने हाथो सें बनी मूर्ति को अपना ईश्वर [ अल्लाह ] मानते थे जैसे अभी हिन्दू लोग किया करते हैं|

आदम अली सलाम नें बहुत प्रयास किया लोगों को मूर्ति पूजा और गलत खुदा में मानने सें रोकने को लेकिन लोगों नें उसका उसका मजाक उराना सुरू कर दिया और उसके धर्म को मानने सें इनकार किया लेकिन उस समय भी 40% लोग उसके धर्म को मनते और अल्लाह पर यकिन रखते

Leave a comment